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मध्य प्रदेश के कटनी रेलवे स्टेशन पर पकड़े गए लगभग 170 मदरसे के बच्चों का मामला: भोपाल विधायक आरिफ़ मसूद का ज़िम्मेदार अफ़सरों के ख़िलाफ़ कार्यवाही की मांग*भोपाल (इक़बाल अंसारी) भारतीय संविधान में दी गई धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी के तहत जिस प्रकार


*मध्य प्रदेश के कटनी रेलवे स्टेशन पर पकड़े गए लगभग 170  मदरसे के बच्चों का मामला: भोपाल विधायक आरिफ़ मसूद का ज़िम्मेदार अफ़सरों के ख़िलाफ़ कार्यवाही की मांग*
भोपाल (इक़बाल अंसारी) भारतीय संविधान में दी गई धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी के तहत जिस प्रकार हिंदू समाज के लोगों को वेद ग्रंथों की शिक्षा सनातन हिंदू धर्म अनुसार दी जाती है। ठीक उसी प्रकार मुस्लिम समाज के बच्चों को भी पवित्र कुरान और हदीस की बुनियादी धार्मिक शिक्षा इस्लामी रीति रिवाज और परंपरा अनुसार मदरसों में प्रदान की जाती है। यूपी बिहार के अत्यंत दूर दराज़ इलाक़े के मुस्लिम पसमांदा समाज के बच्चे धार्मिक शिक्षा ग्रहण करने के उद्देश्य से देश के विभिन्न हिस्सों में जाते हैं। क्योंकि ईद के 2 महीने पूर्व इन मदरसों के शैक्षणिक सत्र खत्म होने के कारण उन बच्चों की छुट्टियां लगती है। इन छुट्टियों में मदरसे में पढ़ने वाले बच्चे अपने माता-पिता और परिवार के लोगों से मिलने के लिए अपने घर जाते हैं और छुट्टियों की समाप्ति के बाद अगले सत्र की शिक्षा ग्रहण करने के लिए अपने वतन से निर्धारित शैक्षणिक संस्थान तक ट्रेनों के माध्यम से जाने की परंपरा वर्षों पुरानी है। यूपी बिहार से ट्रेन के माध्यम से जाने वाले बच्चों को हाल ही में मध्य प्रदेश के कटनी रेलवे स्टेशन पर अधिकारियों के मनमानी के साथ अवैधानिक तरीके से लगभग 170 बच्चों को बंधक बनाए जाने से मुस्लिम समाजजनों में रोष व्याप्त रहा। क्योंकि विगत कई वर्षों से ऐसी घटनाओं में इज़ाफ़ा हुआ है। और यह घटनाएं अब निरंतर हो रही हैं। यह घटनाएं किसके इशारे पर हो रही हैं? सोशल मीडिया के माध्यम से जग जाहिर है। इन घटनाओं से यह अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि मौन रूप से मुस्लिम समाज को टारगेट किया जा रहा है । मुस्लिम समाज जनों ने कटनी की घटना को लेकर अत्यंत रोष व्याप्त था। इन बच्चों के पास पर्याप्त प्रमाण मौजूद थे। बच्चों के पकड़े जाने के 2 दिन के अंदर बच्चों के परिवार के लोग बच्चों के पास पहुंच गए थे। फिर भी उन बच्चों को नहीं छोड़ा गया था। तब इस मामले में भोपाल के लोकप्रिय विधायक आरिफ मसूद ने अपने संवैधानिक पद का उपयोग करते हुए मामले की गंभीरता को देखते हुए हस्तक्षेप किया और एक जागरूक जन प्रतिनिधि की सक्रिय भूमिका निभाकर प्रशासन के समक्ष मुस्लिम समाज और मदरसे के बच्चों का पक्ष मजबूती से रखा।12 दिनों तक लापता रहने के बाद इन बच्चों को वापस उनके परिवारों के पास भेज दिया गया है।
बताया गया है कि इन बच्चों को जबरन ले जाया गया था, जिस पर लोगों में काफ़ी नाराज़गी पाई गई। इस पूरे मामले को लेकर भोपाल के लोकप्रिय विधायक एवं कांग्रेस पार्टी के क़द्दावर नेता जनाब आरिफ़ मसूद ने हस्तक्षेप किया और मुस्लिम समाज के जागरूक जन प्रतिनिधि की हैसियत से सख़्त प्रतिक्रिया दी है और ज़िम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ़ कार्रवाई की मांग की है। भोपाल विधायक जनाब आरिफ़ मसूद ने कहा कि बच्चों को इस तरह उनके परिवारों से अलग करना और बिना सही जानकारी के उन्हें कहीं और ले जाना एक गंभीर मामला है। उन्होंने प्रशासन से सवाल किया कि आखिर 12 दिनों तक इन बच्चों को कहां रखा गया और उनके साथ क्या व्यवहार किया गया?
उन्होंने यह भी कहा कि इन घटनाओं ने मानवाधिकारों का उल्लंघन किया है और इसमें शामिल अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। भोपाल विधायक आरिफ मसूद के वीडियोज़ सोशल मीडिया पर उपलब्ध हैं।देश में जो हालात चल रहे हैं। उनकी भूमिका के साथ मुस्लिम विकास परिषद भोपाल सहित अन्य लोगों और वकीलों ने भी इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर इन बच्चों की मदद करने में काफी सक्रियता दिखाई। कुछ राजनीतिक लोग मदरसा शिक्षा के खिलाफ है। इस परिपेक्ष में मुस्लिम समाज जनों को भी व्यापक रूप से जागरूक होने की आवश्यकता है कि इस कठिन काल में बच्चों को मदरसा भेजने के पूर्व समस्त विधि दस्तावेज़ के साथ विधि सम्मत कार्रवाई करके अपने बच्चों को रवाना करें ताकि भविष्य में ऐसी कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।

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